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ठीक है…! / सुनील वर्मा

आपने कहा…

और हमने भाषण दे डाला…

ठीक है…?

आपने कानून के पुतले फूंके…

और ये लो…हमने नया कानून ही बना दिया…

ठीक तो है…?

ठीक तो है सभी कुछ…

मेरे इस प्यारे देश में…!

और संस्कृति तो हमारी…

पहले से ही महान और ठीक है…

ठीक तो है…?

ठीक है वो मासूम लड़की…

कि जिसको दरिंदों ने कल रात…

चलती हुई बस में नोच-नोच कर खा लिया था…

प्रभु की परम गोद में…

अब ठीक तो है…?

ठीक है सौ करोड से भी ज्यादा की ये भीड़…

आँखों के आंसू ठीक है…

मस्तकों पर प्रत्यांचाओ सी खिंची…

पीड़ा की वो धारियां ठीक हैं…

जवान बेटी को लहुलुहान

सडको पर अर्ध-नग्न देखती…

वृद्ध बाप कि वो सुनसान..पथराई आँखे भी ठीक हैं…

ठीक है इन सौ करोड लोगों के मन मस्तिस्क…

जो हर एक वार पर…

बलि पर कटते हुए बकरों की तरह…तडपते हैं…

और फिर पल भर में ही…

चिर-शांत हो जातें हैं…

सभी कुछ ठीक है…

ठीक नहीं है…

तो बस ये ‘नारीत्व’…

जो कि सब अपराधों…

अव्यवस्थाओं का कारण है…

ठीक नहीं है वो निर्मलता…वो मासूमियत…

जो चार चाँद लगा देती है मनहूस इस नारीत्व में…

और जगा देती है दरिंदगी हमारी…

इस बार जब चुनाव होंगें…

तो हमें ही जितवाना तुम…

और तब हम इस अवांछित ‘नारीत्व’ को…बेफिक्र…

चलती हुई बसों में चीर-फाड़ने का

परमिट दे देंगे…

खत्म कर देंगे वो सब…

जो ठीक नहीं है…

ताकि बनी रहे व्यवस्था…

बना रहे प्रजातंत्र…

और मेरे इस महान देश में…

सब कुछ ठीक रहे…!!

by

Dr Sunil Kumar Verma

Damini Wo Desh Ki Beti Delhi Gang Rape Case‘Theek Hai’ poem depicts the feelings and pain of the masses in India after a notable politician of India said ‘theek hai’ (that everything is all right) ‘off’ the screen after giving a message in the name of country about the infamous 16 December gang rape case in Delhi. The poem highlights how the people in India react every time they are sacrificed but they become silent after some time!

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