You are currently browsing the Uncategorized category

मै एक वैज्ञानिक…! सुनील वर्मा

मै एक वैज्ञानिक हूँ…

कईं दशकों से…

चारदीवारियों में बंद हूँ मैं…

अपनी प्रयोगशालाओं में…

व्याख्यान कक्षों में…

या कि वैज्ञानिक सम्मेलनों में…

क्या होती हैं शहर की रंगीनिया…

पता नहीं मुझे…

बंद होकर अपनी प्रयोगशाला में…

अनुसन्धान करते हुए….यही सोचता हूँ मैं…

कि मेरा अनुसन्धान…

म्रत्युशैय्या पर पड़े….

किसी गरीब बाप की जिन्दगी बचायेगा शायद…

या कि एक मजबूर माँ को…

उसके बेटे से मिलवा देगा…

बना देगा भारत को सक्षम…

लड़ने के लिए बीमारियों से…

भुखमरी से….

प्राकृतिक आपदाओं से…

जीवनदान दे देगा…!

किन्तु यह क्या… !

आज पूरा भारत…

किस ‘दामिनी’ के जीवन की दुवाए मांग रहा है…

क्या हुआ है उसको…कि कम पड़ गयी है अनुसंधानों की उपलब्धियां..

कि मजबूर से दिख रहे है चिकित्सक…

कि चुप है विज्ञान…

और सुन्न पड गए हैं मन-मस्तिष्क… !

खबर आती है…

कि कोई रोग नहीं है…

प्राकृतिक आपदा भी नहीं…

वहशी दरिंदों ने…नोच नोच कर खा लिया है उसको…

लहूलुहान कर दिया है…

अर्धनग्न करके फेंक दिया है सडको पर…!

आहत हूँ मैं…

कि…शहर की रोशनियों से दूर….

दिन रात प्रयोगशालाओं में घुसकर…

किये गए मेरे अनुसंधान…

अर्थहीन हो गए आज…

ख़ोज तो लिए हमने…शायद!

‘मानव’ को बचाने के सामान…

किन्तु ‘मानवता’ को बचाने के साधन…

ख़ोज नहीं पाए हम… !

आह…विडंबना… !

कि अनवरत अनुसंधान में लगी मेरी ये अंगुलियां…

साथ नहीं देती मेरा…!

न जाने क्या-क्या लिखे जा रही हैं…

और पूछ रही हैं मुझसे…

कि क्या यही मानव है वो… जिसकी सेवा में तुम…

तमाम उम्र प्रयोगशालाओं में घुसे रहे…!

और दूर रखा मुझे भी….शहर की रंगीनियों से…!

और कह रही है कि…

तुम करो अपना विज्ञान…

पहुंचा दो इस दुनिया को…चाँद और सितारों के पार…

किन्तु मुझे मेरे दर्द के साथ…अकेले छोड़ दो…!

उतार लेने दो ये दर्द…कागज पर…

तुम विज्ञान करो अपना…

मानव को जिन्दा रखने के लिए…

और मुझे मानवता की मौत पर…

आंसू बहा लेने दो…!!

 

by

Dr Sunil Kumar Verma

 

 

Share |
Page 2 of 1512345...10...Last »

Top