एक सपना देखा है मैंने…! सुनील वर्मा

एक सपना  देखा है मैंने…

कि मुझे भी कुत्तों का कोई झुण्ड…

चलती हुई बस में…

नोच-नोच कर खा डाले…

क्योकि यही तो बस एक जरिया है…

जब सारा देश मुझे…

देश की बेटी कहेगा…!

कि जब सारे लोग मुझमे…

अपनी बहन की छवि देखेंगे…

कि जब जाग जायेगी इंसानियत…

और हवा चल पड़ेगी…

मेरे नारीत्व को सम्मान देने और दिलवाने के लिए…

भीड़ उमड़ पड़ेगी…

पुष्पांजलि देंगे मुझे…

सड़कों पर लोग…!

बिना किसी चलती हुई बस में नुचे तो…

मै बस एक लिपी-पुती शापित-पतित औरत हूँ…

मौज मस्ती का सामान भर हूँ मै…!

इंसानियत के पतन का मूल हू…!

जिसका होना…या कि न होना…

निरर्थक है…इस समाज में…

मेरी सार्थकता तो…

चलती हुई बस में नुचने के बाद होती है यहाँ….

सार्थक होना है मुझे…

बनना है इस देश कि बेटी…

इसीलिए तो कह रही हूँ…

कि काश नोच डाले…

कुत्तों का कोई झुण्ड मुझे भी…

किसी चलती हुई बस में…

ताकि अपने नारी होने पर…

एक अंजलि पुष्प….

एवं सम्मान के दो शब्द पा सकूँ…

मै भी कल…!!

by

Dr.Sunil Kumar Verma

Delhi Gang Rape Case-Damini-Wo-Desh-Ki-Beti

Wo Desh Ki Beti

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